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Saturday, March 17, 2012

Pukaar

ये ठंडी हवा
ये काली घटा
ये बरखा की पहेली बौछार
ऐसे में तेरा साथ
मेरा दिल ये चाहे
आभी जा, आभी जा, तु सनम
अब तो आ जा ना, अब तो आजा

चाहे दिन हो या रात
सुबह हो या हो शाम
मेरे लब पे है तेरा ही नाम
हर पल तेरी याद,
दिल को सताए
आभी जा, आभी जा, तु सनम
अब तो आ जा ना, अब तो आजा

मेरे ख्वाबो में तुम
खयालो में तुम
मेरी पहेली चाहत सिर्फ तुम
दिल की हर धड़कन
तुजको पुकारे
आभी जा, आभी जा, तु सनम
अब तो आ जा ना, अब तो आजा

   

Sunday, October 21, 2007

Move आह से आहा तक !

Move आह से आहा तक !

परेशानियों से लेकर प्रशांति तक
मेरी सफर है आह से आहा तक
जब असार संसार को समजा मैंने
शिकायतों से पहुचा साहजिक स्वीकार तक |

संसारी लोगो के छलकपट
आत्मा के आगे माया का पट
अज्ञान का अंधेरा था घट घट |

पर अब किससे ज़गडा किससे बैर ?
मैं ही मैं हूं धरती से आकाश तक
सभी मेरे ही टू है आत्मबंधू
friend से लेकर foe तक |

अस्तित्त्व का उत्सव है जिन्दगी
अब प्रतिक्षण होती है बंदगी
प्रभु को पाने की प्यास सी जगी |

कहां कहां नही ढूंढा तुजको
गुरुद्वारा से लेकर गिरजाघर तक
ख़ुद के भीतर जब झाँका तो
तामस हटा के जा पंहुचा तुरीय तक |

देखा नये नजरिये से यह जीवन
अंत:शत्रुओं से मुक्त है अब मन
और तोड़ दीये माया के सब बन्धन |

अपने आप को पहेचान लिया
गया अहम् से शिवोहम तक
मन के अन्दर जलाया ज्ञान दीपक
समज लिया द्यैत से लेकर अद्यैत तक |

devil भी मैं , devine भी हूँ मैं ही
जहन्नम एयर जन्नत दोनों हाउ यही
बन गया जब मैं देही से विदेही |

विश्व है 'नेति नेति' की एक विराट मूर्ति
सच्चिदानन्द है दूर से लेकर पास तक
मैं था चंचंल सीमित एक लहर
अब हूँ लहेराते निसिम सागर तक |

परेशानियों से लेकर प्रशांति तक
मेरी सफर है आह से आहा तक |

मनीष पंचमतिया

Tuesday, October 09, 2007

अब...

अब...

अब ना मुक्ति ना बन्धन |
ना स्मित ना रुदन |
आनंद से युक्त हर धड़कन |
एक नूतन स्पंदन !

अब ना आशा ना निराशा !
ना चाहना ना कामना !
ना अपेक्षा ना आकांक्षा |
विश्रांति और शांति |

अब तो बस हमेशा " हाश ! " |
परम संतृप्ति और ज्योति !
नई द्रष्टि नई सृष्टि !
सर्जनहार की एक अनुपम कृति !

जो है आकाश के उस पार |
वो है अब मेरे पास !
महेसूस करे मेरी हर सांस !
'मनीष' यह पल है कुछ ख़ास !

Thursday, March 30, 2006

મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |

મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |

કહેતે હૈ ના આપ, કિ -
પૂછો જો પૂછના હૈ |
પર સવાલ સુનતે હિ.... દેખો દેખો
શર્મ કે મારે ગાલ લાલ લાલ હૈ |
ક્યોઁ ?

મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |

જબ સે દેખ હૈ આપ કો...
હમે ના ચૈન ના કરાર હૈ |
ક્યા આપ કે દીલ ક ભી
યહી હાલ હૈ ?

મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |

એક જમાને મૈઁ... યહ દીલ...
અપના હુવા કરતા થા |
ઉસે ક્યોં નજરો સે કીયા હલાલ હૈ ?
મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |

હર પલ... હર જગહ...
આપ હિ આપ નજર આતે હૈ...
યહ નઝ્મ હૈ ?
યા ફીર
આપ કી યાદોઁ ને કીયા કમાલ હૈ?

મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |

ના હમ શાહરુખ હૈ, ના હિ હૈ હમ ઋતવીક્...
હમ તો અપને આપ મૈં લા-જવાબ હૈ |
વૈસે...
મેરે બારે મૈન આપ કા ક્યા ખયાલ હૈ ?

મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |

આપ પૂછેન્ગે જરુર્, યહ પઢકર, મુજ સે કી -
યહ સબ ક્ય બબાલ હૈ?
પર યારોઁ મેરે...
ક્ય જવાબ દેઁ મનિષ ઉનકા ?
ક્યોં કિ -
મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |

બસ

મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |
મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |
મેરા ઉનસે યહી સવાલ હૈ |